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मुझमे क्या कुछ....
मुझमे क्या कुछ बाकी है जीवन ये एकाकी है पवन नदी औ ' निर्जन वन ये मुझको पास बुलाती है मृदु-मृदु ये लहरे बहती मंद-मंद सी पवन ये कहती विचलित होना न रे ! नर तू जीवन अवश्यम्भावी है क्या मुझमे कुछ बाकी है ? व्यर्थ ये जीवन कहूं न कैसे ? व्यर्थ ये साँसे तजूं न क्यों मै ? किसी के मन को भाया मै नहीं उर में भरा ये रूदन है फिर भी मुझमे कुछ बाकी है ! आशाओं को सींचूं फिर भी भाग्य - पुष्प को खिलाऊँ फिर भी काल-विजय का सपना देखूं जीवन को जीवंत करना है अरे! जीवन में सब कुछ बाकी है । |
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8:05 pm
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कविता
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हरिवंशराय बच्चन
बड़े बड़े परिवार मिटें यों, एक न हो रोनेवाला,
हो जाएँ सुनसान महल वे, जहाँ थिरकतीं सुरबाला,
राज्य उलट जाएँ, भूपों की भाग्य सुलक्ष्मी सो जाए,
जमे रहेंगे पीनेवाले, जगा करेगी मधुशाला।।२१।
--- हरिवंशराय बच्चन
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- एक छोटे शहर मे पली बढी,कविता लेखन मे रुचि ,और संगीत मे रुचि रखने वाली मै ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखती हूं
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18 टिप्पणियाँ:
मृदु-मृदु ये लहरे बहती
मंद-मंद सी पवन ये कहती
विचलित होना न रे ! नर तू
जीवन अवश्यम्भावी है
क्या मुझमे कुछ बाकी है ?
सुन्दर !
बहुत सुन्दर और सार्थक रचना!
आशाओं को सींचूं फिर भी
भाग्य - पुष्प को खिलाऊँ फिर भी
काल-विजय का सपना देखूं
जीवन को जीवंत करना है
अरे! जीवन में सब कुछ बाकी है ।उम्मीद की बेहतरीन अभिवयक्ति.....
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति आशावादी रचना
बहुत सुन्दर प्रस्तुति
आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 13-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ
सुंदर रचना।
प्रेरणा देती ek अच्छी कविता
जब तक साँसें है तब तक कुछ ना कुछ बाकी रहता ही है..
सुन्दर भाव...
मृदु-मृदु ये लहरे बहती
मंद-मंद सी पवन ये कहती
विचलित होना न रे ! नर तू
जीवन अवश्यम्भावी है
क्या मुझमे कुछ बाकी है ?
आशा की तरंगें संचारित करता सुंदर गीत।
वाह बहुत सुन्दर भाव संजोये हैं।
वाह!!
.
बेहतरीन रचना ..
बेहतरीन गीत...बधाई स्वीकारें
नीरज
वाह बहुत खूब
सुन्दर संदेश देती भावपूर्ण प्रस्तुति....निःसंदेह सराहनीय.....
कृपया इसे भी पढ़े-
नेता- कुत्ता और वेश्या (भाग-2)
आशा है तो सब कुछ है।
अच्छी कविता।
superb
-Nice blog sharing information
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